भ्रष्टाचार की शिकायत इंदौर में दर्ज कराने की तैयारी : चिकलोडा पंचायत का कथित घोटाला अब ईओडब्ल्यू के दरवाजे पर
Laxman Singh Yadav
Sat, Feb 21, 2026
इन्दौर। जनपद पंचायत देपालपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चिकलोडा में सामने आए कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत सचिव जसवंतसिंह यादव पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर वे अब सीधे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इंदौर में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। इस निर्णय के बाद मामला स्थानीय प्रशासनिक स्तर से निकलकर आपराधिक जांच एजेंसी की चौखट तक पहुंचता नजर आ रहा है।
टैक्स वसूली में कथित गड़बड़ी बना मुख्य आधार
ग्रामीणों का आरोप है कि कर वसूली के नाम पर उनसे ₹3500 तक की राशि ली गई, जबकि अधिकृत रसीद मात्र ₹500 की दी गई। शेष राशि का कोई स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया। यदि यह तथ्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामला सीधे आर्थिक अनियमितता एवं शासकीय धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगा। यही बिंदु अब ईओडब्ल्यू शिकायत का केंद्रीय आधार बनने जा रहा है।
ग्राम सभा और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी सवाल
24 जनवरी 2026 को आयोजित ग्राम सभा के दिन पंचायत भवन बंद रहने और सचिव की अनुपस्थिति के आरोपों ने भी मामले को गंभीर बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी और रिकॉर्ड संधारण में पारदर्शिता का अभाव पूरे प्रकरण को संदेहास्पद बनाता है।
जनपद स्तर पर कार्रवाई की प्रतीक्षा, पर बढ़ता अविश्वास
जनपद पंचायत देपालपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा मालाकार सैनी ने स्वीकार किया है कि सचिव का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया है तथा जांच प्रतिवेदन तैयार कर जिला पंचायत को भेजा जाएगा। वहीं जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन को आगे की कार्रवाई हेतु प्रकरण प्रेषित किया जाना प्रस्तावित है।
इसके बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि अब तक निलंबन या कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई न होने से प्रशासनिक निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न हुआ है। यही कारण है कि उन्होंने उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराने का निर्णय लिया है।
ईओडब्ल्यू इंदौर में होगी औपचारिक शिकायत
ग्रामीणों ने बताया कि एक आरटीआई कार्यकर्ता के साथ मिलकर वे आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) इंदौर में लिखित शिकायत प्रस्तुत करेंगे। यह शिकायत पुलिस अधीक्षक रामेश्वर सिंह यादव को संबोधित होगी, जिसमें ग्राम पंचायत चिकलोडा में कथित वित्तीय गड़बड़ी, कर वसूली में अनियमितता और अभिलेखीय विसंगतियों की आपराधिक जांच की मांग की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, शिकायत में वित्तीय लेन-देन का ऑडिट, बैंक खातों की जांच, रसीद पुस्तिकाओं का परीक्षण तथा संबंधित अभिलेखों की फोरेंसिक समीक्षा की मांग भी शामिल की जाएगी।
मामला केवल पंचायत का नहीं, प्रशासनिक विश्वसनीयता का
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा सुशासन और पारदर्शिता के दावों के बीच यह प्रकरण प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न खड़े कर रहा है। यदि शिकायत ईओडब्ल्यू स्तर तक पहुंचती है, तो यह संकेत होगा कि ग्रामीणों का भरोसा स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया से उठ चुका है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि अब वे निष्पक्ष और आपराधिक स्तर की जांच चाहते हैं, ताकि यह तय हो सके कि कथित अनियमितताओं में कितनी सच्चाई है और यदि दोष सिद्ध होता है तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई हो। अब देखना यह है कि ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी इस प्रकरण को किस गंभीरता से लेती है और क्या यह मामला व्यापक वित्तीय जांच का रूप लेता है।
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