दुआ सभागृह में ‘सब ठीक’ का दावा… भीतर ही भीतर क्यों खौल रही है परामर्श : शुभारंभ से तबादले तक—क्या ‘प्रभाव की राजनीति’ ने पुस्तकालय को विवादों में घेर लिया?
Kirti Rana
Fri, Dec 19, 2025
कीर्ति राणा इंदौर । देवी अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय के क्षेत्रीय ग्रंथपाल के रिक्त पद पर जबलपुर से स्थानांतरित हर्षिता डेविड सोमवार को पदभार ग्रहण करेंगी।प्रभारी ग्रंथपाल के रूप में कार्य देख रहीं लिली डाबर का आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता इन्हें यहां से हटाकर प्राचार्य खजराना हायर सेकेंडरी स्कूल पदस्थ करने के आदेश जारी कर चुकी हैं। देवी अहिल्या केंद्रीय पुस्तकालय परामर्शदात्री समिति के सदस्य भी समिति की सचिव डाबर द्वारा समिति सदस्यों को विश्वास में लिये बगैर मनमाने निर्णय लेने से नाराज हैं।
पदस्थ की गई हर्षिता डेविड से प्रजातंत्र ने फोन पर चर्चा में जब पूछा कि यह प्रचारित किए जाने में कितनी सच्चाई है कि आप इंदौर ज्वाइन नहीं करना चाहती हैं। उनका कहना था जबलपुर केंद्रीय पुस्तकालय में 17 वर्ष से क्षेत्रीय ग्रंथपाल पद पर रहने से एक अटैचमेंट तो ही जाता है लेकिन शासन ने तबादला किया है तो उस आदेश का पालन करना ही है। ट्रेन रिजर्वेशन संबंधी दिक्कत के चलते विलंब हुआ है। यह कहना सही नहीं कि मैं ज्वाइन करना ही नहीं चाहती, सोमवार को ज्वाइन कर लूंगी, कोशिश रहेगी कि ग्रंथपाल लिली डाबर ने ग्रंथालय की बेहतरी के लिए जो कार्य किए हैं उसे कायम रख सकूं। दुआ सभागृह संबंधी मामले में कुछ भी कहना उचित नहीं है क्योंकि मुझे कोई जानकारी नहीं है। समिति अध्यक्ष कमिश्नर सर के निर्देशों का पालन मेरी प्राथमिकता है।
🔹इसलिये नाराज हैं समिति के सदस्य
दुआ सभागृह के नवीनीकरण-सौंदर्यीकरण कार्य पूर्ण होने के बाद विधिवत शुभारंभ प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। समिति सचिव लिली डाबर ने संभागायुक्त डॉ सुदाम खाड़े के हाथों शुभारंभ की रस्म पूर्ण करा ली, साथ में ग्रंथालय का स्टॉफ ही रहा। एक समिति सदस्य का कहना है सांसद लालवानी यदि दिल्ली में थे तो अन्य सदस्य तो इंदौर में ही थे, किसी को सूचना तक नहीं दी। एक अन्य सदस्य का कहना था परामर्शदात्री समिति के सदस्यों को आमंत्रित करने का मतलब होता शुभारंभ समारोह में कमिश्नर के आसपास समिति के सदस्य रहते ऐसे में सचिव का फोटो-प्रभाव नजर नहीं आता। इससे पहले भी जानबूझकर ऐसा किया जाता रहा है तत्कालीन समिति अध्यक्ष-संभागायुक्त दीपक सिंह रहे हों या संजय दुबे के हाथों जितने भी कार्यक्रमों की शुरुआत की गई समिति सदस्यों की उपस्थिति को नजरअंदाज किया जाता रहा वजह यही कि शहर में यह मैसेज जाए कि समिति सचिव के कारण ग्रंथालय और दुआ सभागृह में काम हो रहे हैं जबकि समस्त कार्यों में धनराशि आवंटन समिति अध्यक्ष की सिफारिश पर ही शासन द्वारा किया जाता है।
समिति सदस्यों की किरायावृद्धि मामले में भी नाराजी इसलिये है कि उन्हें विश्वास में लिये बगैर सारे निर्णय किए गए।शहर हित के कार्यों में धनराशि संबंधी सहयोग करने वाली संस्थाएं पीपीपी मॉडल जैसी योजनाओं में क्यों सहयोग करेंगी जब उनके द्वारा दिए आर्थिक सहयोग का मनमाना उपयोग किया जाएगा।
शहर का एकमात्र सस्ता सभागृह है जो शहर के मध्य में और पर्याप्त पार्किंग वाला था लेकिन हाईकोर्ट द्वारा पार्किंग के लिये केंद्रीय ग्रंथालय वाली जमीन लेने के बाद दुआ सभागृह की पार्किंग स्पेस भी प्रभावित हुई है। नवीनीकरण के पहले भी इस सभागृह की दर्शक क्षमता 114+6 कुल 120 क्षमता वाली थी, दो करोड़ खर्च करने के बाद भी कुर्सियों की संख्या उतनी ही है, बेहतर होता कि इतनी राशि खर्च करने में कम से कम 50 कुर्सियों की वृद्धि का भी प्लान बनाया होता।
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