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कलेक्टर के सख्त निर्देश पर चिकलोड़ा में बड़ी कार्रवाई : देपालपुर तहसील के चिकलोड़ा हल्के के शासकीय सर्वे नंबर 22 की भूमि पर अवैध विभाजन व अतिक्रमण उजागर

Jivan doliya

Sat, Feb 21, 2026

देपालपुर। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के स्पष्ट एवं कड़े निर्देशों के बाद देपालपुर तहसील अंतर्गत ग्राम चिकलोड़ा में शासकीय भूमि पर हुए कथित अतिक्रमण एवं अनियमित भू-अभिलेखीय प्रविष्टियों के मामले में प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए विस्तृत मौके का निरीक्षण किया। शनिवार को तहसीलदार धर्मेंद्र चौकसे राजस्व अमले के साथ ग्राम चिकलोड़ा पहुंचे। उनके साथ संबंधित हल्का पटवारी एवं ग्राम कोटवार उपस्थित रहे। प्रारंभिक जांच (प्रथम दृष्टया परीक्षण) में यह तथ्य सामने आया कि देपालपुर तहसील के हल्का चिकलोड़ा के मूल शासकीय सर्वे नंबर 22 की भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय होकर “चिकलोड़ा पंचायत तालाब” के नाम दर्ज है। निरीक्षण एवं अभिलेख परीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि उक्त मूल शासकीय सर्वे नंबर 22 को विभाजित करते हुए कई नवीन सर्वे नंबर निर्मित कर दिए गए हैं, जो राजस्व प्रक्रिया एवं सक्षम प्राधिकारी की विधिसम्मत अनुमति के बिना निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज पाए गए। इतना ही नहीं, इन विभाजित खसरा नंबरों पर क्रय-विक्रय (रजिस्ट्री) की प्रक्रिया भी संपन्न होना सामने आया है, जिससे पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है। राजस्व अधिकारियों के अनुसार यदि शासकीय तालाब मद की भूमि का अवैध रूप से विभाजन कर निजी नामांतरण किया गया है, तो यह कृत्य मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों का प्रत्यक्ष उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में अभिलेख संशोधन, नामांतरण निरस्तीकरण, अवैध रजिस्ट्री की वैधता की जांच तथा संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी जांच संभावित है। तहसीलदार चौकसे ने स्पष्ट किया कि मामले में विधिवत सीमांकन, अभिलेखों का पुनर्परीक्षण एवं संपूर्ण दस्तावेजी जांच की जा रही है। संबंधित व्यक्तियों को नोटिस जारी कर बेदखली की कार्यवाही प्रस्तावित की जाएगी। साथ ही, यदि शासकीय भूमि के अवैध हस्तांतरण की पुष्टि होती है तो प्रकरण उच्चाधिकारियों को प्रेषित कर दंडात्मक एवं आपराधिक कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार कलेक्टर वर्मा ने निर्देश दिए हैं कि तालाब एवं शमशान जैसी सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अभिलेखीय हेरफेर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीर राजस्व अनियमितता की श्रेणी में लेते हुए समयबद्ध जांच के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से संकेत स्पष्ट है कि शासकीय संपत्तियों के संरक्षण में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत पाए जाने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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