सिस्टम फेल्योर बना छह माह से भुगतान ठप रहने का कारण : देपालपुर में रोजगार सहायकों का वेतन संकट गहराया
SANDEEP SEN Editor
Sat, Jan 31, 2026
देपालपुर। जनपद पंचायत देपालपुर अंतर्गत कार्यरत रोजगार सहायकों का वेतन भुगतान तंत्र बीते छह महीनों से पूरी तरह ध्वस्त स्थिति में पहुंच चुका है। यह केवल वेतन विलंब का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक अव्यवस्था, तकनीकी विफलता और वित्तीय प्रबंधन की गंभीर कमजोरी का प्रतीक बन गया है। बहु-पोर्टल आधारित भुगतान प्रणाली, बार-बार बदली गई संरचनाएं, और स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारण के अभाव ने पूरे सिस्टम को अस्थिर कर दिया है, जिसका सीधा दुष्प्रभाव जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ रहा है।
पूर्व में रोजगार सहायकों को मनरेगा पोर्टल के माध्यम से एकीकृत प्रणाली के तहत लगभग 18,000 रुपये मासिक वेतन एकमुश्त प्राप्त होता था, जिससे भुगतान प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनी रहती थी। इसके पश्चात प्रशासनिक निर्णयों के तहत वेतन प्रणाली को दो भागों में विभाजित किया गया—9,000 रुपये मनरेगा पोर्टल से तथा 9,000 रुपये स्टांप शुल्क मद से। इस दोहरे भुगतान मॉडल ने तकनीकी स्तर पर डेटा मैपिंग, फंड फ्लो, बैंक इंटीग्रेशन और ट्रांजैक्शन प्रोसेस को अत्यधिक जटिल बना दिया, जिससे भुगतान प्रक्रिया में लगातार व्यवधान उत्पन्न होने लगे।
वर्तमान में वेतन भुगतान को ट्रेजरी-आधारित पोर्टल सिस्टम से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें मूल जिले के बजाय अन्य जिलों के माध्यम से भुगतान प्रोसेसिंग की जा रही है। इस बहु-जिला, बहु-पोर्टल संरचना ने प्रशासनिक समन्वय और तकनीकी नियंत्रण दोनों को कमजोर कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक एक सेंट्रलाइज्ड डेटा सिस्टम, एकल ट्रांजैक्शन चैनल और स्पष्ट वर्क-फ्लो मॉडल लागू नहीं किया जाता, तब तक भुगतान प्रणाली में स्थायित्व संभव नहीं है।
इस प्रशासनिक और तकनीकी विफलता का सबसे गंभीर प्रभाव रोजगार सहायकों के जीवन पर पड़ रहा है। लगभग 50 प्रतिशत कर्मचारी ऐसे हैं जिनकी आजीविका पूरी तरह इसी नौकरी पर निर्भर है। कई कर्मचारियों पर बैंक लोन, पर्सनल फाइनेंस और घरेलू दायित्वों का बोझ है। समय पर ईएमआई न भर पाने की स्थिति में उनका सिविल स्कोर खराब होने का वास्तविक खतरा उत्पन्न हो चुका है, जिससे भविष्य में ऋण, आवास, शिक्षा और बैंकिंग सुविधाओं तक उनकी पहुंच बाधित हो सकती है। यह स्थिति अब व्यक्तिगत संकट से निकलकर सामाजिक-आर्थिक संकट का रूप लेती जा रही है।
देपालपुर जनपद पंचायत की नवागत सीईओ श्रीमती पूजा मालाकार सैनी से कर्मचारियों और क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि वे इस पूरे भुगतान तंत्र का तकनीकी ऑडिट, प्रोसेस रिव्यू और प्रशासनिक पुनर्गठन कर त्वरित समाधान सुनिश्चित करेंगी। कर्मचारियों की मांग है कि जब तक नई ट्रेजरी-आधारित प्रणाली पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाती, तब तक एक अंतरिम वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था लागू कर बकाया वेतन का तत्काल भुगतान किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीघ्र ही एकीकृत भुगतान प्लेटफॉर्म, स्पष्ट प्रशासनिक जिम्मेदारी, और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन प्रणाली लागू नहीं की गई, तो यह संकट केवल देपालपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अन्य जनपद पंचायतों में भी इसी तरह की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वर्तमान परिदृश्य में यह मुद्दा केवल कर्मचारियों के वेतन का नहीं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता, शासन प्रणाली की कार्यक्षमता और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न बनकर खड़ा हो गया है।
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