देपालपुर तहसीलदार धर्मेंद्र चौकसे की कलम से लेख : “फार्मर आईडी : डिजिटल क्रांति से किसान सशक्तिकरण की नई दिशा”
Fri, Mar 13, 2026
“फार्मर आईडी : डिजिटल क्रांति से किसान सशक्तिकरण की नई दिशा”
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों के समग्र विकास, पारदर्शिता और कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए फार्मर रजिस्ट्री के अंतर्गत फार्मर आईडी तैयार करने की महत्वाकांक्षी योजना संचालित की जा रही है। यह योजना केवल एक प्रशासनिक पहल भर नहीं है, बल्कि कृषि व्यवस्था को डिजिटल आधार प्रदान करने वाला ऐसा दूरदर्शी कदम है, जो आने वाले वर्षों में प्रदेश के किसानों को नई पहचान, सुरक्षा और अवसर प्रदान करेगा।
आज के समय में जब देश तेजी से डिजिटल इंडिया की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब कृषि क्षेत्र को भी आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की आवश्यकता बन गया है। इसी सोच के साथ मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के प्रत्येक किसान को एक यूनिक डिजिटल पहचान (फार्मर आईडी) प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस पहल से किसान और उसकी भूमि का एक समग्र और प्रमाणित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे शासन की योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी रूप से किसानों तक पहुँच सकेगा।
प्रदेश में लगभग 95.18 लाख किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी हैं। राज्य सरकार द्वारा अब तक 72 लाख से अधिक किसानों की फार्मर आईडी जनरेट की जा चुकी है, जो इस योजना की सफलता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। उल्लेखनीय है कि फार्मर आईडी के लिए पंजीकरण की संख्या पीएम किसान योजना के लाभार्थियों से भी अधिक हो चुकी है।
जनवरी 2026 तक प्रदेश में कुल 1,01,76,594 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिनमें से 97,01,495 फार्मर आईडी का सत्यापन पूर्ण हो चुका है तथा लगभग 4,75,099 सत्यापन शेष हैं। राज्य सरकार द्वारा इन शेष सत्यापनों को शीघ्र पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि फार्मर आईडी योजना का लाभ प्रदेश के प्रत्येक पात्र किसान तक सुनिश्चित रूप से पहुँच सके।
दरअसल, फार्मर आईडी केवल एक पहचान पत्र नहीं है, बल्कि यह किसानों के लिए डिजिटल सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम है। इसके माध्यम से किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं, अनुदानों, सब्सिडी और तकनीकी सेवाओं का लाभ सरलता और पारदर्शिता के साथ प्राप्त होगा। साथ ही शासन के पास किसानों और उनकी भूमि से जुड़ा एक समग्र डाटाबेस उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को “किसान कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस संकल्प का मूल उद्देश्य किसानों की आय वृद्धि, कृषि क्षेत्र की उत्पादकता में बढ़ोतरी और किसानों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। इस दृष्टि से फार्मर आईडी जैसी योजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं।
यह योजना किसानों को केवल प्रशासनिक सुविधाएँ प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भूमि संबंधी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े से सुरक्षा भी प्रदान करती है। जब प्रत्येक किसान और उसकी भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रूप से उपलब्ध होगा, तब फर्जी रजिस्ट्री, गलत नामांतरण और भूमि विवादों जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। इस प्रकार फार्मर आईडी योजना किसानों की संपत्ति और अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।
इसके अतिरिक्त, “हर खेत – हर किसान” की सटीक पहचान सुनिश्चित करने में भी यह योजना अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी। कृषि भूमि, फसल पैटर्न और उत्पादन से संबंधित डेटा उपलब्ध होने से शासन को कृषि योजनाओं की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी। इससे कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी बल मिलेगा।
आज वैश्विक स्तर पर कृषि व्यापार और निर्यात की संभावनाएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लागू की जा रही नई ट्रेड पॉलिसी 2026 के संदर्भ में फार्मर आईडी जैसी योजनाएँ अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होंगी। किसानों से जुड़ा समग्र और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध होने से कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने, बाजारों के विस्तार और मूल्य संवर्धन की दिशा में प्रभावी नीतियाँ तैयार की जा सकेंगी।
इसके साथ ही यह पहल विश्व व्यापार संगठन (WTO) के कृषि समझौतों के संदर्भ में भी भारत के किसानों के हितों की रक्षा में सहायक सिद्ध हो सकती है। वैश्वीकरण के इस दौर में जब कृषि बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, तब किसानों के लिए मजबूत डेटा तंत्र और नीति समर्थन अत्यंत आवश्यक है। फार्मर आईडी योजना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है।
मध्य प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। यही कारण है कि राज्य को लगातार सात वर्षों से कृषि कर्मण (कृषि कर्मठ) अवार्ड प्राप्त हो रहा है। यह उपलब्धि राज्य की किसान हितैषी नीतियों, प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था और किसानों की मेहनत का परिणाम है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री कृषक कल्याण योजना और फार्मर आईडी जैसी योजनाओं ने किसानों की आय में स्थिरता लाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों में विश्वास और उत्साह दोनों बढ़े हैं।
आज मध्य प्रदेश संपूर्ण खाद्यान्न उत्पादन में देश में द्वितीय स्थान पर पहुँच चुका है, जो राज्य की कृषि क्षमता और संभावनाओं का स्पष्ट प्रमाण है। यदि इसी प्रकार किसान हितैषी नीतियों और तकनीकी नवाचारों को आगे बढ़ाया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब मध्य प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करेगा।
निश्चित रूप से फार्मर आईडी जैसी योजनाएँ केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की कृषि व्यवस्था की आधारशिला हैं। इनके माध्यम से किसानों और कृषि भूमि का एक मजबूत डिजिटल डाटाबेस तैयार होगा, जो आने वाले समय में नीति निर्माण, कृषि अनुसंधान, बाजार प्रबंधन और निर्यात प्रोत्साहन के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
यह पहल “एग्री ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया” के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके अंतर्गत कृषि क्षेत्र को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मध्य प्रदेश सरकार के इन दूरदर्शी प्रयासों से प्रदेश न केवल कृषि उत्पादन में नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा, बल्कि कृषि नवाचार, एग्री स्टार्टअप और प्रतिस्पर्धी संघवाद के क्षेत्र में भी देश के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरेगा।
अंततः यह कहा जा सकता है कि फार्मर आईडी योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह किसानों के सम्मान, सुरक्षा और समृद्धि की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम है। यदि इसी प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ इन योजनाओं का क्रियान्वयन जारी रहा, तो आने वाले समय में मध्य प्रदेश निस्संदेह कृषि विकास और किसान कल्याण का राष्ट्रीय अग्रदूत बनकर उभरेगा।
— लेखक :
धर्मेन्द्र चौकसे
तहसीलदार, देपालपुर
देपालपुर में प्रशासनिक सतर्कता : जल संकट, गेहूं खरीदी और राजस्व प्रकरणों पर सख्त निर्देश
Fri, Mar 13, 2026
देपालपुर। आगामी गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक तैयारियों की समीक्षा तथा विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार 13 मार्च को देपालपुर में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) प्रदीप सोनी की अध्यक्षता में सभी विभागों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभागवार कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध और जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में एसडीएम ने विशेष रूप से आगामी गर्मी के दिनों में संभावित जल संकट को लेकर संबंधित विभागों से जानकारी ली। उन्होंने पेयजल स्रोतों की स्थिति, वैकल्पिक जल व्यवस्था, टैंकर प्रबंधन तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति की तैयारियों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि किसी भी क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए अभी से ठोस कार्ययोजना बनाकर कार्य किया जाए।
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान एसडीएम ने बताया कि 1 अप्रैल से उपार्जन केंद्रों पर गेहूं खरीदी प्रारंभ होने जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि तौल व्यवस्था, बारदाना, भंडारण, परिवहन और किसानों के लिए छाया, पेयजल जैसी सुविधाएं समय रहते उपलब्ध कराई जाएं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
बैठक में राजस्व एवं कृषि विभाग के अधिकारियों को खेतों में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्ती बरतने के निर्देश भी दिए गए। एसडीएम ने कहा कि नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ ही आगजनी की घटनाओं की संभावना भी बढ़ जाती है, इसलिए किसानों को जागरूक करते हुए इस पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
इसके अलावा विद्युत विभाग को निर्देश दिए गए कि गर्मी के मौसम में बिजली आपूर्ति सुचारू रखी जाए तथा खराब ट्रांसफार्मर या अन्य तकनीकी समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को गर्मी के मौसम में होने वाली बीमारियों की रोकथाम, पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए गए। जनपद पंचायत विभाग को भी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए गए।
राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए एसडीएम ने तहसीलदार धर्मेंद्र चौकसे, नायब तहसीलदार निधि धाकड़ तथा कुलदीप सिंह को निर्देशित किया कि राजस्व न्यायालयों में लंबित सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण और बटांकन जैसे मामलों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।
साथ ही विशेष राजस्व अभियान के तहत 13 मार्च से 21 मार्च तक चलाए जा रहे अभियान की भी समीक्षा की गई। एसडीएम ने निर्देश दिए कि 28 फरवरी तक लंबित सभी प्रकरणों का अभियान के दौरान प्राथमिकता से निराकरण किया जाए। इसके अतिरिक्त लंबित राजस्व वसूली के मामलों में आगामी 15 दिनों के भीतर लक्षित वसूली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के पश्चात राजस्व निरीक्षकों और पटवारियों की अलग से बैठक आयोजित की गई, जिसमें राजस्व वसूली, विशेष राजस्व वसूली अभियान, फार्मर रजिस्ट्री, जनगणना सहित अन्य प्रशासनिक कार्यों की पटवारीवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं और अभियानों के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी तथा आमजन को समय पर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।